

बिसरख गांव, उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर जिले में स्थित, एक ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण स्थान है। यह गांव त्रेतायुग के महापंडित और लंकाधिपति रावण की जन्मस्थली माना जाता है। बिसरख का नाम रावण के पिता ऋषि विश्रवा के नाम पर पड़ा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यहां रावण का जन्म हुआ था, और यही कारण है कि इस गांव में दशहरा के दौरान रावण दहन नहीं किया जाता, बल्कि उसकी पूजा की जाती है।
इस गांव का सबसे प्रमुख धार्मिक स्थल शिव मंदिर है, जहां एक अष्टकोणीय शिवलिंग स्थापित है। इस मंदिर और क्षेत्र के ऐतिहासिक प्रमाणों को समझने के लिए हमें इसकी पौराणिक कथाओं, पुरातत्वीय खोजों और आधुनिक विकास योजनाओं पर ध्यान देना होगा।
बिसरख का शिव मंदिर अपनी अनूठी संरचना और प्राचीनता के लिए प्रसिद्ध है। इसमें स्थित अष्टकोणीय शिवलिंग इसे भारत के अन्य शिवलिंगों से अलग बनाता है।
1990 के दशक में, प्रसिद्ध तांत्रिक चंद्रास्वामी ने पुरातत्व विभाग के साथ मिलकर बिसरख में खुदाई कराई थी। इस दौरान निम्नलिखित महत्वपूर्ण वस्तुएं प्राप्त हुईं:
बिसरख गांव में मंदिर को और अधिक भव्य बनाने की योजना बनाई जा रही है। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने मंदिर के सर्वेक्षण के बाद निम्नलिखित कार्यों की योजना बनाई है:
बिसरख गांव, ग्रेटर नोएडा के नजदीक स्थित होने के कारण तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है। इसके बावजूद, गांव के लोग अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक धरोहर को बनाए रखने के लिए प्रयासरत हैं।